राजस्थान के जालोर के सेवाड़ा में स्थित पातालेश्वर मंदिर देशभर में विख्यात मंदिर हैं, जिसमें देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिये आते हैं, देशभर में विख्यात इस मंदिर का इतिहास हज़ारों साल पुराना हैं।
जालोर के रानीवाड़ा उपखंड मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर पर सेवाड़ा में स्थित भगवान महादेव का पातालेश्वर मंदिर हज़ारों साल पुराना मंदिर हैं, देशभर के बड़े मंदिरों के इतिहास में सेवाड़ा पातालेश्वर मंदिर का भी इतिहास देखने को मिलता हैं। देशभर में विख्यात इस मंदिर में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिये आते हैं। पातालेश्वर मंदिर के इतिहास के जानकार बताते हैं की
राव वंशजों के पास मौजूद पौराणिक तथ्यों के मुताबिक वि.सं. 412 में धारा नगरी के राजा भोज ने बह्मभट् रावों को 12 गांव रिसायत मे दिए थे। उनके रियासत काल में वि.सं. 1162 में इस शिव मंदिर का निर्माण करवाया गया जो उस समय अपनी भव्यता के लिए देश भर में विख्यात था। यहां पर छोटे-छोटे 52 मंदिर भी थे।
जिस पर मुगल शासक मोहम्मद गजनवी ने सोमनाथ से लौटते समय इस मंदिर को ध्वस्त कर जमींदोज कर दिया था। उस दौरान उन छोटे-छोटे 52 मंदिरों को भी ध्वस्त कर ज़मींदोज़ किया गया था। दशकों तक इसके अवशेष छिन्न-भिन्न अवस्था में बिखरे पड़े रहे उसके बाद ग्रामीणों की पहल पर मंदिर का पुन: जीर्णोद्धार करवाया गया हैं।
सन् 2004-05 में मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य को शुरू करने के दौरान छोटे-छोटे ध्वस्त मंदिरों को हटाया गया जिसमें दो मंदिरों को पुराने इतिहास की जानकारी के लिये रखा गया जो आज भी यहां मौजूद हैं।
हज़ारों साल पुराने इन मंदिरों को भी देखने के लिये हज़ारो लोग आते हैं।
सातवीं आठवीं शताब्दी में नगर के सेवाड़ा गांव स्थित प्राचीन शिवालय की शिल्पकला मध्यकालीन मंदिरों के समकक्ष बताई जा रही है। इतिहास में दर्ज तथ्यों के अनुसार सेवाड़ा गांव स्थित पातालेश्वर महादेव आठवीं शताब्दी के समय मोहम्मद गजनवी की ओर से आक्रमण कर तोड़ दिया गया था। उसके बाद बरसों तक यह मंदिर उपेक्षा का शिकार रहा। जिस पर क्षेत्रवासियों की ओर से मंदिर का जीर्णोद्धार करवाने के साथ इसके पुराने वैभव को फिर से जिंदा करने के लिए पत्थरों पर उसी समय के अनुसार नक्काशी कार्य करवाया गया।
मंदिर परिसर में भगवान विष्णु के नये मंदिर निर्माण के लिये खुदाई में
18 दिसंबर 2014 को खुदाई के दौरान मंदिर परिसर में प्राचीन मूर्तियां निकली थी। जो मूर्तियां इस हज़ारों साल पुराने मंदिर के इतिहास पर मुहर लगाती हैं।
जिसकी सूचना तत्कालीन कलेक्टर जितेन्द्र कुमार सोनी को देने पर कलेक्टर सोनी ने जायजा लेकर खुदाई से निकली मूर्तियों को रानीवाड़ा तहसील कार्यालय के डबल लॉकर वाले रूम में रखने के निर्देश दिए थे। इसके बाद ग्रामीणों की आस्था को देखते हुए प्रशासन ने मूर्तियों को मंदिर को सुपुर्द किया था।
ग्रामीणों की ओर से मंदिर का पुराना स्वरूप लौटाने का प्रयास युद्धस्तर पर शुरू किया था 12 सालों तक रात दिन शिल्प कला को निखार कर मंदिर का पुन: निर्माण किया गया।
हज़ारों साल पुराने 52 छोटे छोटे मंदिर थे
जालोर के सेवाड़ा पातालेश्वर महादेव मंदिर में हज़ारों साल पुराने 52 छोटे छोटे मंदिर थे जिनमें से अब दो मंदिर अभी भी यहां पर मौजूद हैं जो मंदिर के हज़ारों साल पुराने इतिहास के गवाह हैं।
जालोर के सेवाड़ा पातालेश्वर महादेव मंदिर में 2014 में भगवान विष्णु मंदिर के निर्माण के लिये खुदाई में प्राचीन मूर्तियां निकली थी जो इन मंदिर में ही रखी हुई हैं।
Share ON