पीने के लिए पानी की तलाश भी एक संघर्ष, देश आज़ादी के इतने साल बाद भी यह हाल

जालोर। जालोर का नेहड़ क्षेत्र आज भी देश आजादी के इतने सालों बाद भी कच्ची बेरियों से गंदा पानी पीने को मजबूर है, ग्रामीणों के लिए पीने का पानी तलाश करना एक संघर्ष है, ज़मीन खोदकर कच्ची बेरियो से मटमैला गंदा पानी आज भी ग्रामीण पी रहे हैं।

कच्ची बेरिया खोदकर गंदा पानी पीने को मजबूर

जालोर का नेहड़ क्षेत्र देश आजादी के इतने सालों बाद भी अभी प्यासा है…. नेहड़ क्षेत्र के आकोडिया, कुकड़िया, खेजड़ीयाली सहित दर्जनभर गांव जहां पर शुद्ध पानी पीने को लेकर कोई इंतजाम नहीं है जलदाय विभाग की ओर से इन गांवों में पेयजल की आपूर्ति नहीं होती हैं। इतना ही नहीं इतने सालों में जलदाय विभाग और सरकारी सिस्टम ने इन गांवों में पेयजल सप्लाई को लेकर कोई प्रयास तक नहीं किये । नर्मदा नहर से एक छोटी वितरिका कुकड़िया गांव तक बनाई गई थी लेकिन इन गांवों में नहर की वितरिका में कभी पानी पहुंचा ही नहीं जिसके चलते गर्मी के दिनों में हाल में इन गांवों में पानी की भारी क़िल्लत हैं……गर्मी के दिन शुरू होते ही पानी की दिक्कत और अधिक बढ़ गई है ऐसे में कई सालों से इन गांवों के ग्रामीण अपनी प्यास बुझाने के लिए जमीन में कच्ची बेरिया खोदकर गंदा पानी पीने को मजबूर है,
ग्रामीण ज़मीन खोदकर कच्ची बेरी से पीने के लिये पानी का जुगाड़ करते और कुछ दिन में कच्ची बेरी में पानी सूखने से एक ओर नई कच्ची बेरी खोदते ऐसे ही पीने के पानी के लिये संघर्ष करते हैं। कच्ची बेरियो में ज़मीन का रेझा हुआ मटमैला गंदा निकलता हैं जिससे ग्रामीण अपनी प्यास बुझाते हैं, कच्ची बेरी में पानी पूरा होने पर महिलाओं को घंटो इंतज़ार करना पड़ता हैं तब जाकर पानी ज़मीन से रेझता हुआ एकत्रित होने से महिलाएं गंदे पानी से बर्तन भरती हैं, ग्रामीणों के लिये यह हर रोज़ का पानी के लिये संघर्ष हैं।

नेहड़ क्षेत्र के गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित

नेहड़ क्षेत्र के गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है, नेहड़ क्षेत्र के गांवों में पीने को पानी नसीब नहीं होता लेकिन पानी को लेकर कोई बड़ी योजना नेहड़ क्षेत्र के लिये अभी तक धरातल पर नहीं बनी, विधानसभा क्षेत्र में मीठे पानी की नर्मदा नहर परियोजना के तहत नर्मदा नहर आये कई साल बीत गये लेकिन इतने सालों बाद भी नेहड़ के कुकड़िया और आस पास के गांवों में पानी पहुंचाने को लेकर कोई योजना नहीं बनी और जलदाय विभाग ने कभी इन ग्रामीणों की सुध तक नहीं ली। गांवों में जीएलआर टांके बनाए तो गए लेकिन कई सालों से सूखे पड़े, अधिकतर टांके क्षतिग्रस्त हो गए लेकिन जलदाय विभाग से लेकर अन्य अधिकारियों को सुध लेने की फुर्सत नहीं है।
अब उम्मीद की जानी चाहिये की नेहड़ क्षेत्र के गांवो के लिए पेयजल स्कीम तैयार कर, धरातल पर पानी पहुंचाया जाये ताकि इन गांवों के ग्रामीणों को पीने के लिये शुद्व पानी नसीब हो सके।

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