बाखासर सुखा बन्दरगाह: 10 साल का इंतज़ार ख़त्म, IIT मद्रास ने सौंपी DPR

बाड़मेर/जालोर। पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर और जालोर की सीमा पर स्थित बाखासर के पास एक महत्वाकांक्षी ‘सूखा बंदरगाह’ बनाने की दशकों पुरानी मांग अब पूरी होने की कगार पर है। करीब 10 साल तक कागजों तक सीमित रही यह परियोजना, नई सरकार के गठन के बाद तेजी से आगे बढ़ी है और अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास ने इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है।


पूर्व सांसद देवजी पटेल बन्दरगाह की लम्बे समय से कर रहे मांग
बाखासर में सूखा बंदरगाह बनाने की मांग करीब 10 साल पहले 2015 में प्रमुखता से उठी थी, पूर्व सांसद देवजी पटेल ने तत्कालीन सांसद रहते हुए इस मांग को प्रमुखता से उठाने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करके भी मांग को सामने रखा था वहीं केन्द्रीय मंत्री नीतिन गडकरी, तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी पत्र भेजकर सुखा बन्दरगाह की मांग को प्रमुखता से उठाया था उस दौरान सुखा बन्दरगाह के सर्वे में भी तेज़ी आई थी वहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रूचि भी दिखाई थी। इस क्षेत्र में कृत्रिम नहर के माध्यम से पोर्ट बनाने की योजना बनी थी। 2014 में तत्कालीन केंद्रीय जहाजरानी और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस सर्वे प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद मुंदड़ा पोर्ट से बाखासर तक हवाई सर्वे भी कराया गया था। शुरुआती चरण में, सरकार ने इस परियोजना का प्रस्ताव अडाणी ग्रुप को दिया था, लेकिन कच्छ के रण से सटा यह इलाका लवणीय और बंजर होने के कारण, समूह ने लागत अधिक होने का हवाला देते हुए इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई।
इस उपेक्षा के चलते, करीब 10 साल तक यह महत्वपूर्ण परियोजना सरकारी कागजों तक सिमटी रही और पश्चिमी राजस्थान के लिए आर्थिक विकास का एक बड़ा सपना अधर में लटक गया।


IIT मद्रास ने अपनी DPR रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी
प्रदेश में नई भाजपा सरकार के गठन के बाद, इस सूखे बंदरगाह की मांग को एक बार फिर पुरजोर तरीके से उठाया। इसके परिणामस्वरूप, केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य ने इस दिशा में कार्रवाई को गति दी। केंद्र सरकार ने इस इनलैंड पोर्ट की DPR तैयार करने की जिम्मेदारी IIT मद्रास को सौंपी।
हाल ही में, IIT मद्रास ने अपनी मसौदा DPR रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है, जिसकी समीक्षा राज्य के अधिकारी कर रहे हैं। राज्य के जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने भी इस परियोजना की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी मिलते ही, बाड़मेर-जालोर से सटे कच्छ के रण में सूखा बंदरगाह बनने का सपना साकार हो जाएगा।


NW-48: 262 किमी का जलमार्ग
यह सूखा बंदरगाह, जालोर और बाड़मेर क्षेत्र को गुजरात के कांडला पोर्ट के माध्यम से सीधा अरब सागर से जोड़ेगा। इसके लिए, कुल 262 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण किया जाएगा, जिसे बाखासर रण तक लाया जाएगा। यह जलमार्ग जवाई, लूणी और रण ऑफ कच्छ नदी प्रणाली पर विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को राष्ट्रीय जलमार्ग–48 घोषित किया है।
इस विशाल परियोजना में लगभग ₹10,000 करोड़ से अधिक की ड्रेजिंग का काम शामिल होगा। यह काम जलमार्ग में नौवहन को सक्षम करेगा और माल के सुचारू आवागमन में मदद करेगा, जिससे सड़क और रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा।


पश्चिमी राजस्थान के लिए वरदान
बाखासर इलाके की भौगोलिक परिस्थितियां समुद्री बंदरगाह जैसी ही हैं, और प्रस्तावित जलमार्ग की जमीन बंजर और लवणीय क्षेत्र है, जो परियोजना के लिए उपयुक्त है। यह इनलैंड पोर्ट एक बार चालू होने के बाद पश्चिमी राजस्थान प्रमुख व्यापारिक केंद्र बन सकता है।

  • आर्थिक गलियारा: यह बंदरगाह राजस्थान को गुजरात, अरब होते हुए सीधा इज़राइल तक जोड़ सकता है, जिससे राज्य के लिए आयात-निर्यात का एक बड़ा केंद्र बनेगा।
  • व्यापार और राजस्व: इससे कपड़ा, पत्थर, तिलहन, ग्वार, दालों और बाजरा जैसे उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे, जिससे राज्य को राजस्व में वृद्धि होने की उम्मीद है।
  • रोजगार: DPR के अनुसार, इस परियोजना से राजस्थान, गुजरात और आस-पास के क्षेत्रों में करीब 50,000 नए रोजगार पैदा होने की संभावना है।
    अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी पर टिकी हैं, जिसके बाद पश्चिमी राजस्थान के विकास का यह नया आर्थिक गलियारा हकीकत बन सकेगा।
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