जयपुर । राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज़ हो गई है। हाल ही में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद, अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें जोरों पर हैं। यह कवायद ऐसे समय हो रही है जब सरकार जल्द ही अपना दो साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही है और आगामी चुनावों के मद्देनज़र सभी वर्गों और क्षेत्रों को साधने का प्रयास किया जा रहा है।
कोरम पूरा करने की तैयारी
नियमानुसार, राजस्थान विधानसभा सदस्य संख्या 200 में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं कुल सदस्यों का 15%। वर्तमान में, मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल में 24 मंत्री हैं। इसका मतलब है कि अभी 6 पद रिक्त हैं, जिन्हें भरा जाना बाकी है।
रिक्त पदों को भरने के साथ-साथ मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों को शामिल करने और कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव या उन्हें हटाने की भी संभावना है। इस फेरबदल का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरणों को साधना है।
संतुलन साधने की कवायद
मंत्रिमंडल विस्तार के पीछे पार्टी का मुख्य लक्ष्य संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों को संतुलित करना है:
क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व: शेखावाटी और मेवाड़ जैसे क्षेत्रों को अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की चर्चा है, ताकि क्षेत्रीय असंतोष को दूर किया जा सके।
जातीय संतुलन: गुर्जर, मेघवाल और अन्य महत्वपूर्ण समुदायों को सरकार में अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग भी पार्टी के भीतर उठ रही है।
वरिष्ठ नेताओं का प्रभाव: पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले गुट को साधने की रणनीति भी इस फेरबदल का एक हिस्सा मानी जा रही है।
प्रदर्शन का आकलन: कुछ मंत्रियों के कामकाज का आंतरिक आकलन भी इस फेरबदल का आधार हो सकता है, जिसके चलते अच्छा प्रदर्शन न करने वाले मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है।
जल्द हो सकती है घोषणा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की केंद्रीय नेताओं और संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों से लगातार मुलाकातें इस बात का संकेत दे रही हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर शीर्ष स्तर से हरी झंडी मिल चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जल्द ही यानी दिसंबर में सरकार के दो साल पूरे होने से पहले मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की घोषणा की जा सकती है।