बाड़मेर, राजस्थान: प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा हाल ही में जिलाध्यक्षों की घोषणा के बाद उपजा गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। जोधपुर के बाद अब बाड़मेर जिले में भी पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया है। पूर्व कार्यवाहक जिलाध्यक्ष गोपाराम मेघवाल ने एक कार्यक्रम के दौरान कड़ा विरोध जताते हुए, बड़ा बयान दिया हैं जिससे स्थानीय कांग्रेस में हड़कंप मचा हुआ हैं। पूर्व कार्यवाहक जिलाध्यक्ष गोपाराम मेघवाल द्वारा एक कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान की विडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा हैं।
बुधवार को पचपदरा विधानसभा क्षेत्र के कल्याणपुर में संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए गोपाराम मेघवाल ने अपना दर्द बयां किया। उनकी यह स्पीच गुरुवार को वीडियो के रूप में सामने आई है, जिसने बाड़मेर की राजनीति में हलचल मचा दी है।
गोपाराम मेघवाल ने अपनी नियुक्ति को याद करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान यह महसूस किया गया था कि मेघवाल और अल्पसंख्यक समुदाय के समर्थन के बिना पार्टी जीत नहीं सकती। उन्होंने दावा किया कि “तब बिना मांगें, दिल्ली से ऑर्डर करवाकर बाड़मेर से गफूर अहमद और बालोतरा से गोपाराम मेघवाल को जिलाध्यक्ष बना दिया गया।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “हमारा उपयोग ले लिया। अब डेढ़ साल में हटा दिया। एमपी पाँच साल के लिए होता है, हमें भी पाँच साल रख देते। हम कोई तनख्वाह नहीं मिलती है, एमपी और विधायक को तनख्वाह मिलती है।
उन्होंने अपने संबोधन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एससी-एसटी के व्यक्ति को विधायक या सांसद की एक बार टिकट मिलेगी, तो वह जीत जाएगा। दूसरी बार भी मिलेगी, तो भी जीत जाएगा। लेकिन, तीसरी बार उसकी टिकट काट दी जाती है।
क्योंकि तीसरी बार जीतेगा तो कानून का जानकार हो जाएगा। विधानसभा और लोकसभा में आपके हितों की बात करेगा। आपके मंत्रिमंडल में जगह मांगेगा। इसलिए तीसरी बार टिकट नहीं दी जाती है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर मिल भी जाती है तो ‘उनको हार दिया जाता है।’
जबकि अन्य समुदायों के लोग 9-9 बार तक टिकट, विधायक और मंत्री बन जाते हैं।