हनुमानगढ़। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में बुधवार को ड्यून इथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित फैक्ट्री के विरोध में किसानों का आंदोलन हिंसक हो गया। टिब्बी इलाके के राठी खेड़ा गाँव के पास, किसानों और पुलिस के बीच भीषण झड़प हुई, जिसके बाद किसानों ने ट्रैक्टरों से फैक्ट्री की निर्माणाधीन दीवार को तोड़ दिया और 16 से अधिक गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।

पुलिस ने किया लाठीचार्ज, किसानों ने फूंके वाहन
किसानों ने फैक्ट्री के विरोध में पहले एसडीएम कार्यालय के सामने सभा की। शाम करीब 4 बजे, किसानों ने फैक्ट्री की दीवार तोड़ने के लिए कूच कर दिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
हिंसा और तोड़फोड़: पुलिस द्वारा रोकने की कोशिश किए जाने पर किसानों और पुलिस में झड़प हुई। किसानों ने ट्रैक्टरों का इस्तेमाल करके फैक्ट्री की निर्माणाधीन दीवार को ध्वस्त कर दिया।
आगजनी: उपद्रव के दौरान, गुस्साए किसानों ने फैक्ट्री परिसर में खड़ी 10 निजी गाड़ियां, एक पुलिस वाहन, और 4 बाइक समेत कुल 16 वाहनों को आग लगा दी। फैक्ट्री कर्मियों के आवासीय परिसर और कई वाहनों को भी क्षतिग्रस्त किया गया।
नियंत्रण के प्रयास: पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे।
कांग्रेस विधायक समेत कई लोग घायल
इस हिंसक झड़प में कई लोग घायल हुए हैं, जिनमें पुलिस अधिकारी, कर्मचारी और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं।
विधायक घायल: किसानों के समर्थन में पहुँचे कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया भी लाठीचार्ज में घायल हो गए। उन्हें तुरंत हनुमानगढ़ जिला अस्पताल ले जाया गया।
इंटरनेट और बाजार बंद
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से टिब्बी कस्बे और आसपास के गाँवों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। एहतियात के तौर पर इलाके के स्कूल और बाज़ार भी बंद रखे गए हैं।
पर्यावरण क्लीयरेंस पेंडिंग, किसान कर रहे थे विरोध
किसानों का यह विरोध ड्यून इथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा प्रस्तावित 40 मेगावाट के अनाज-आधारित इथेनॉल प्लांट को लेकर है। यह कंपनी चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड है और इसका उद्देश्य भारत के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का समर्थन करना है।
विरोध का मुख्य कारण: जिला प्रशासन के अनुसार, इस फैक्ट्री को अभी तक एनवायरनमेंट क्लियरेंस (EC) नहीं मिली है, और कंपनी का आवेदन 2022 से पेंडिंग है। किसान पर्यावरण प्रदूषण और भूजल उपयोग को लेकर लंबे समय से इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे थे।
प्रशासन ने उपद्रव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के मामले में सख्त कार्रवाई की बात कही है।