बाड़मेर/बालोतरा- राज्य सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक निर्णय के तहत पाकिस्तान से सटे सरहदी जिलों—बाड़मेर और बालोतरा—का नक्शा पूरी तरह बदल दिया है। राजस्व विभाग द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के बाद दोनों जिलों के इलाकों का पुनर्गठन कर दिया गया है। इस बदलाव के तहत उपखंडों की अदला-बदली की गई है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन और स्थानीय राजनीति पर पड़ना तय है।
बायतू फिर बाड़मेर का हिस्सा, धोरीमन्ना का बदला जिला
अधिसूचना के अनुसार, बायतू उपखंड को बालोतरा जिले से हटाकर फिर से बाड़मेर में शामिल कर दिया गया है। वहीं, बाड़मेर के महत्वपूर्ण हिस्से माने जाने वाले गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को अब बालोतरा जिले के अधीन कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सुधार बताया जा रहा है, लेकिन धरातल पर इसे लेकर विरोध के स्वर भी तेज हो गए हैं।
सियासी घमासान: कहीं आतिशबाजी, कहीं आक्रोश
सीमाओं में इस बदलाव के साथ ही प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है:
- भाजपा का जश्न: अधिसूचना जारी होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न चौराहों पर पटाखे फोड़कर खुशी जताई। कार्यकर्ताओं का कहना है कि बायतू को बाड़मेर में शामिल करना जनहित में लिया गया फैसला है।
- कांग्रेस का हमला: कांग्रेस ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि यह निर्णय जमीनी हकीकत और आमजन की सुविधाओं को ताक पर रखकर लिया गया है।
दिग्गज नेताओं ने घेरा: ‘नक्शों के खेल’ से नहीं डरेंगे
हरीश चौधरी (बायतू विधायक): मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और बायतू विधायक हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया पर इस फैसले पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने लिखा—
“तुम इधर भेजो मुझे, तुम उधर भेजो मुझे, नक़्शों से खेल कर चाहे जिधर भेजो मुझे। सीमाएँ बदलने से ना डरूँगा ना झुकूँगा, मैं अपने लोगो के साथ खड़ा हूँ चाहे किधर भेजो मुझे।”
हेमाराम चौधरी (वरिष्ठ कांग्रेस नेता): पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने सरकार से इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने कहा कि धोरीमन्ना और गुड़ामालानी के पश्चिमी-दक्षिणी गांवों को बालोतरा में शामिल करना अन्यायपूर्ण है। यह प्रशासनिक बदलाव कागजों में तो सुधार दिख सकता है, लेकिन व्यवहार में आम नागरिक का जीवन कठिन बनाएगा।
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