जोधपुर। एमडीएम हॉस्पिटल में नवजातों की अदला-बदली को लेकर उपजा विवाद अंततः डीएनए रिपोर्ट के आने के बाद पूरी तरह से सुलझ गया है। रिपोर्ट ने हॉस्पिटल प्रशासन के दावे पर मुहर लगाते हुए यह स्थापित कर दिया है कि विमला ने लड़के को जन्म दिया था, जबकि ममता के लड़की हुई थी। स्टाफ की एक छोटी सी गलती के कारण टैग पर गलत नाम लिखे जाने से यह सारा भ्रम पैदा हुआ था। डीएनए जांच से यह साबित हो गया है कि दोनों माताओं के पास उनके ही बच्चे हैं।
टैग पर गलत नाम लिखने से हुई थी गफलत
मामला तब शुरू हुआ जब पीपाड़ निवासी ममता और खरड़ा रणधीर निवासी विमला को 3 दिसंबर को एमडीएम की जनाना विंग में भर्ती करवाया गया था।
हॉस्पिटल प्रशासन ने जन्म के तुरंत बाद रजिस्टर और टिकट में यही सही जानकारी दर्ज की थी और दोनों परिजनों के हस्ताक्षर भी लिए गए थे।
विवाद तब शुरू हुआ जब विमला के बेटे पर लगाए गए टैग पर गलती से ‘बेबी ऑफ ममता, सन ऑफ राकेश नागौरा’ लिख दिया गया। टैग पर लिखे इस गलत विवरण के कारण, वहाँ मौजूद चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को गलतफहमी हो गई और उसने ममता के परिजनों को बेटा होने की गलत सूचना दे दी, जिससे यह पूरा विवाद खड़ा हो गया।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष सही: डीएनए रिपोर्ट ने अब इस बात की पुष्टि कर दी है कि अस्पताल प्रशासन का शुरुआती दावा बिल्कुल सही था। टैग पर की गई क्लैरिकल गलती ही इस पूरे घटनाक्रम का मूल कारण थी, न कि बच्चों की वास्तविक अदला-बदली।
डीएनए रिपोर्ट आने के बाद, दोनों परिवारों को उनका सही बच्चा मिल जाने की पुष्टि हो गई है, जिससे यह मामला अब समाप्त हो गया है।
Share ON