राजस्थान में “विधायक निधि” के बदले कमीशन मांगने के एक बड़े सनसनीखेज मामले ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। एक दैनिक समाचार पत्र द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में तीन विधायकों पर विकास कार्यों की अनुशंसा के लिए कथित तौर पर 40% तक कमीशन मांगने का आरोप लगा है, जिसके बाद सरकार और राजनीतिक दलों ने त्वरित कार्रवाई की है।

मुख्यमंत्री का कड़ा रुख: हाई-लेवल जांच और खाते फ्रीज
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस मामले को अत्यंत गंभीर और चिंतनीय बताते हुए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की घोषणा की है।
उच्च-स्तरीय जांच के आदेश: मुख्यमंत्री ने मामले की गहन जांच के लिए मुख्य सतर्कता आयुक्त (अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह) की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को दिए हैं।
MLA-LAD खाते फ्रीज: मुख्यमंत्री के आदेश पर, आरोपी तीनों विधायकों के MLA LAD खातों को तुरंत प्रभाव से फ्रीज (स्थगित) कर दिया गया है।

विधानसभा अध्यक्ष का संज्ञान: सदाचार समिति को जांच
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने भी इस पूरे प्रकरण पर गहरा संज्ञान लिया है।
जांच का निर्देश: विधानसभा अध्यक्ष ने ट्वीट करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा किसी भी तरह का भ्रष्टाचार अस्वीकार्य है और यह लोकतंत्र की गरिमा के विपरीत है।
उन्होंने राजस्थान विधानसभा की सदाचार समिति (Ethics Committee) को इस पूरे प्रकरण की जांच करने के निर्देश दिए हैं, जिससे सदन के भीतर विधायकों के आचरण पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
आरोपों के अनुसार, इन विधायकों ने विधायक निधि से सरकारी स्कूलों में दरी-फर्श (कारपेट) सप्लाई जैसे कार्यों की अनुशंसा के लिए कथित तौर पर कमीशन की मांग की।

विपक्ष और नेताओं की प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस खबर को अत्यंत गंभीर और चिंताजनक बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
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