साइलेंट हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा: सर्दी और तेज अलार्म हो सकते हैं जानलेवा

देश में सर्दी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही हृदय रोग विशेषज्ञों ने साइलेंट हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। डॉक्टरों के अनुसार, सर्द मौसम और जीवनशैली से जुड़ी कुछ छोटी आदतें, जैसे अलार्म की तेज आवाज़ से अचानक जागना, दिल और दिमाग दोनों के लिए घातक साबित हो सकती हैं।
ठंड कैसे बढ़ाती है हार्ट अटैक का जोखिम?
विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ने के दो मुख्य कारण हैं:

  • रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना
  • ठंड के संपर्क में आने पर शरीर अपनी गर्मी बनाए रखने के लिए प्राकृतिक रूप से रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ने लगता है।
  • इससे रक्तचाप अचानक बढ़ जाता है और हृदय को पूरे शरीर में रक्त पंप करने के लिए अधिक दबाव डालना पड़ता है।
  • जिन लोगों के हृदय की धमनियों में पहले से ही रुकावट या प्लाक जमा है, उनमें इस बढ़े हुए दबाव के कारण हार्ट अटैक की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
  • रक्त का गाढ़ा होना: ठंडे तापमान में रक्त थोड़ा गाढ़ा हो सकता है, जिससे थक्के बनने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, जो हार्ट अटैक का सीधा कारण बन सकती है।
    तेज़ अलार्म से क्यों होता है नुकसान?
    डॉक्टरों ने एक और महत्वपूर्ण खतरे की ओर इशारा किया है:
  • जब कोई व्यक्ति गहरी नींद में होता है, तो उसका ब्लड प्रेशर और हृदय गति धीमी होती है।
  • तेज़ आवाज़ वाले अलार्म या अचानक झटके से जागने पर, शरीर में तेजी से एड्रेनालाईन और अन्य तनाव वाले हार्मोन का स्राव होता है।
  • आप हार्मोन के इस अचानक उछाल से दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ जाता है, जो कमजोर हृदय वाले लोगों, खासकर बुजुर्गों और उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए स्ट्रोक या हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।
  • साइलेंट हार्ट अटैक के 7 मुख्य लक्षण
    साइलेंट हार्ट अटैक में सीने में तेज़ दर्द नहीं होता, जिसके कारण लोग इसे पहचान नहीं पाते और इलाज में देरी हो जाती है। निम्नलिखित 7 लक्षणों पर ध्यान देना आवश्यक है:
  • छाती में बेचैनी या दबाव: तेज दर्द के बजाय हल्का दबाव या जकड़न महसूस होना।
  • शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द: जबड़े, गर्दन, पीठ, दांत या एक हाथ में दर्द या सुन्नता।
  • असामान्य थकावट: बिना किसी कारण के अत्यधिक या अचानक थकावट महसूस होना।
  • सांस लेने में तकलीफ: अचानक सांस फूलना या सांस लेने में कठिनाई।
  • पसीना आना: ठंड के बावजूद अचानक ठंडा पसीना आना।
  • चक्कर आना या सिर घूमना: कमजोरी महसूस होना।
  • पेट की परेशानी: अपच या उल्टी जैसा महसूस होना।
  • ठंड में दिल को सुरक्षित रखने के लिए सलाह
  • धीरे-धीरे जागें: तेज़ अलार्म के बजाय शांतिपूर्ण धुन या कम आवाज़ का उपयोग करें और बिस्तर से तुरंत उठने के बजाय कुछ मिनट तक बैठे रहें।
  • गुनगुना पानी पीकर शुरुआत करें: सुबह उठकर सबसे पहले एक गिलास गुनगुना पानी पिएं।
  • खुद को गर्म रखें: सुबह-शाम घर से बाहर निकलते समय टोपी, दस्ताने और गर्म कपड़े जरूर पहनें, जिससे शरीर का तापमान स्थिर रहे।
  • नियमित जांच: उच्च रक्तचाप और मधुमेह के रोगी अपने डॉक्टर से नियमित संपर्क में रहें।
  • हल्का व्यायाम: ठंड में भी हल्की वॉकिंग या योग जारी रखें, लेकिन सुबह बहुत जल्दी कड़ाके की ठंड में बाहर जाने से बचें।
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